आने वाले समय में भारत के जितने भी मंदिर हैं, वे सभी वेदान्ति शक्ति परिषद के अंतर्गत आएँगे। भारत के सभी मंदिर सनातनियों के पूर्वजों की संपत्ति हैं। इस पर केवल सनातनी कर्मयोगियों का ही अधिकार है।
परिषद की प्रस्तावित भूमिका
सहयोग राशि का उद्देश्य एवं उपयोग
वेदान्ति शक्ति परिषद को मंदिरों से प्राप्त होने वाली समस्त सहयोग राशि का उपयोग सनातनी समाज के शैक्षिक, स्वास्थ्य संबंधी एवं आर्थिक विकास के लिए किया जाएगा। परिषद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि इस राशि का सदुपयोग सनातनी परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा, समाज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ तथा युवाओं को सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में हो।
- शिक्षा के क्षेत्र में: स्कूलों की स्थापना एवं संचालन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
- कॉलेज एवं विश्वविद्यालय: बच्चों को उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं संचालन किया जाएगा।
- स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में: अस्पतालों की स्थापना एवं संचालन, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी।
- रोजगार एवं आत्मनिर्भरता: कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर, स्वरोजगार और योग्य युवाओं को आगे बढ़ने में सहयोग देने के लिए योजनाएँ बनाई जाएँगी।
हमारा संकल्प
मंदिरों से प्राप्त सहयोग राशि को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के माध्यम से समाज के विकास का आधार बनाना, ताकि सनातनी समाज के बच्चों को बेहतर भविष्य, युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए आवश्यक सहयोग मिल सके।